Tapas Sutradhar
in a journey....
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Thursday, 30 January 2014
एक चिट्ठी तुम्हारे नाम........
सुना
है
कि
तुम
बड़ी
भोली
हो
,
सबके
मन
में
बसती
हो
,
खुश
मिजाज
और
सादगी
भरी
हो
.....
जब
पहली
बार
देखा
तो
कुछ
ऐसा
ही
लगा !!!
लगा
कि
बड़ी
जग़ह
से
आयी
हो
जीवन
में
बहुत
अनुभव
लेकर
आयी
हो
.
मिट्टी
से
जुड़ी
हो
,
और
थोड़ी
नाजुक
भी
हो
!!!
जैसे
-
जैसे
कुछ
समय
साथ
बीता
खट्टे
-
मीठे
पल
कुछ
हम
बाँटे
तो
कुछ
और
पाया
,
कुछ
बहुत
अनोखा
सा
पाया
एक
और
ही
रुप
पाया
जो
सख्त
,
सावधान
और
बहुत कुछ
ख़ुद
के
अंदर
ही
है
छिपा रखा है
सच
कहता
हूँ
,
तुमसे
प्यार
हो
गया
है
एक
अजीब
सा
रिश्ता
जो
तुमसे
बन
गया
है
बेनाम
और
बहुत
खास
एक
कड़ी
जोड
गया है
एक
अनोखी
खुशी
महसूस
करवा
गया
जो
जुवान
से
मैं
साझा
ना
कर
पाया
क्या
करूँ
,
शायद
ऐसा
ही
प्यार
हो
गया
!!!
हां
पता
है
मुझे
कि
अब
तुम्हे
मुझसे
कुछ
घबराहट
भी
होने
लगी
है
सहमी
-
सहमी
सी
अब
कुछ
तुम
रह्ने
लगी
हो
इक
अपराध
बोध
सा
अब
मुझको
लगने
लगा
है
तुमको
खोने
या
तुमसे
दूर
होने
का
डर
भी
सताने
लगा
है
पर
अब
मै
क्या
करूँ
,
तुमसे
जो
मुझे प्यार
हो
गया
है
!!!
बनना
-
बिगड़ना
,
खोना
-
पाना
,
ये
सब
तो
प्रकृति
का
नियम
है
जब
हम
ख़ुद
ही
नश्वर
है
तो
कौन
अमर
बन
पाया
है
,
भावनाओं
पर
भी
कब
किसी
का
जोर
चल
पाया
है
प्यार
को
कब
किसी
ने
रोक
पाया
है
!!!
अंत
में
अब
बस
यही
दुआ
करते
है
कि
तुम्हारी
मुस्कुराहट
ऐसे
ही
बनी
रहे
और
तुम्हारी
दुनिया
भी
खुशी
से
भरी
रहे
और
तुम
हमेशा
मेरी
यादों
में
जिंदा
रहो
हमेशा
मुस्कुरती
हुई
बस
मेरी
ही
रहो
!!!
-
-
तापस सूत्रधर
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