दूर हो बोहोत, मगर पास भी हो,
ओझल हो आँखों से, पर बसी भी हो उसमें,
बातें कहा है, जो गूँज रही है,
कानों में सब गुण-गुणा रही है........
बता रही है, सता रही है,
साथ ना तुम्हारे, तड़पा रही है,
तड़प रहा हूँ, तड़प रही हो,
उलझ-उलझ के गुंथ रहे है......
- तापस सूत्रधार