Tuesday, 4 February 2014

दूरी का एहसास.......

दूर हो बोहोत, मगर पास भी हो,
ओझल हो आँखों से, पर बसी भी हो उसमें,
बातें कहा है, जो गूँज रही है,
कानों में सब गुण-गुणा रही है........

बता रही है, सता रही है,
साथ ना तुम्हारे, तड़पा रही है,
तड़प रहा हूँ, तड़प रही हो,
उलझ-उलझ के गुंथ रहे है...... 
                     
                           - तापस सूत्रधार

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