दूर से आती, चहकती चिड़िया
देख के मुझको कुछ कह जाती
रंग बिरंगी इठलाती चिड़िया
याद हमेशा तुम्हारी दिलाती
अलग-अलग है; रंग है उनका
अलग-अलग है सुर उनका
याद हमेशा मुझे दिलाती
अलग-अलग वो यादें तुम्हारी
कभी चहकती, कभी चुप रहती
कभी उड़ के फिर, कही और जाती
कभी तुम बोलती, कभी तुम हंसती
कभी रूठ के तुम, मुझसे मनवाती
तिनका-तिनका जोड़ के चिड़िया
लगी हुई है घर बनाने
जैसे यादों को पिरो कर
सपनो का घर, चले हम बसाने
आँखे नम हो जाती है जब
यादें वो याद आतीं है तब
उड़ान भर के अब आसमान में
जाने कितनी दूर जाना है अब
बस एक ही आस अब लगी है मन में
कि उड़ते रहना अब तुम्हारे संग में
कि उड़ते रहना अब तुम्हारे संग में
.....तापस सूत्रधर