बस यादें बन के रह गयी.....
यादों कि एक पोटली में अब
सब कुछ सिमट के रह गयी......
वो छोटी-छोटी यादों में अब,
ना जाने कितने लम्हे सिमट गयी....
वो हर एक अधूरी पलों में अब,
अधूरी जिंदगी, पुरी अधूरी बन के रह गयी.....
अब वो हर एक पल हमे,
लगे सताने,हँसने और रुलने.....
जिनके भरोसे चले थे हम
जिंदगी एक कच्ची मटकी में बिताने.....
- त1पस सूत्रधार