ये अंधेरो को चीरती, उजालो कि सुर्खी,
जगा रहि है उमीदे, जो कभी ना हो पाएँगी पूरी,
ये बारिश का गिरना, और उमीदों का मिटना,
दिल पे आते ही दिल का बैठ जाना !
- तापस सूत्रधार
जगा रहि है उमीदे, जो कभी ना हो पाएँगी पूरी,
ये बारिश का गिरना, और उमीदों का मिटना,
दिल पे आते ही दिल का बैठ जाना !
- तापस सूत्रधार
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