पहुंच गये हम यहाँ, ना जाने कैसे
ना कोई साथी, ना कोई सहारा
हो गये लाचार हम, ना जाने कैसे
ना जाने कैसे हम पहुचे यहाँ वैसे
जहां सुनते हम भजन और अज़ान भी ऐसे
ना जाने क्यों ये लगता है मुझको
जैसे ज़न्नत में बसा कोई खुशकिस्मत खुद को
सिगरेट बना चिलम
और बेडरूम बनी क्लासरूम
ना जाने क्यों फिर भी
सुख हुआ नही बिलकुल भी कम
ना जाने कैसे बीतता चला गया ये समय
और समेट लाया साथ में यादें ढेर सारी
कुछ खट्टी, कुछ मीठी और कुछ कभी ना भुला पाने वाली
ना जाने कैसे पहुच गये हम यहाँ
जो लगती है, स्वर्ग की नगरी अभी
.....तापस सूत्रधर
लेखन की दुनिया में स्वागत है भाई. लिखते रहो और नए.नए विचारों से हमें अवगत कराते रहो. इसके लिए हार्दिक शुभकामनाएं.
ReplyDeletepost the CHIDIYA one man.. it was so romantic n rocking! :)
ReplyDeletewelcome to bloggin world! :) :) I hope u love my blog too! :)
ReplyDeletehttp://nafdemanasi.blogspot.com/